तेरा संघर्ष (MOTIVATIONAL POEM) // A.P.J. ABDUL KLAM SIR
तेरा संघर्ष (MOTIVATIONAL POEM)
क्या मिला तुझको क्यों खबर रखता है तू ,
जो दिया मैंने तुझको संभल ले
क्यों फ़िक्र करता है तू
ये युग कल भी तेरा था आज भी और कल भी तेरा रहेगा !
चंद लमहो के समंदर में डूब के देख ले !
तैरना खुद ही सीख जायेगा एक पहल कर के देख ले !!
आँधिया चलती रहेगी देख मत तू कागजो की कस्तिया यु न फेक तू ! इस जहा को फिर देख तू !!
कल सबेरा फिर से होगा फिर से आएगी शाम !
जो बीत गया अफ़सोस क्यों ,जो छूट गया अफ़सोस क्यों !!
मैं चला ,चलता ,चला था ,वक्त के इस ख्वाब में मुड़ न फिर देख तू !
कल किसी ने क्या देखा ,आज फिर से देख तू ,
कर्म के इस चक्र में अडिग अकेला फिर निकल तू!!
बेसब्र की इन आँधियो में सब्र न फिर तोङ तू !
फिर मिलेंगे, मिलते रहेंगे, कर्म की इस कर्म भूमि में !!
इन चंद लहरों की तरह,मिट सकने वाला नहीं तू !
फिर इंतजार किसका ,इस ज्वार के सैलाब में !!
बन सुनामी पार कर तू ,हर के भी जीत तू !
छोङ गया ये दो पल गमो के ,
हम तो पंछी धरा वाले ,आसमा का भी सीना चीर गया तू !!
WRITTEN BY =AK OFFICIAL
Good poem
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